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Can I read Meer Taqee ‘Meer’ ki Shero Shayri - The Poetry of Meer Taqee 'Meer': A Melodious Journey through His Verses on EtoBox?

Meer Taqee ‘Meer’ ki Shero Shayri - The Poetry of Meer Taqee 'Meer': A Melodious Journey through His Verses by Sharma, Mahesh Dutt is a book available to read on EtoBox.

What is Meer Taqee ‘Meer’ ki Shero Shayri - The Poetry of Meer Taqee 'Meer': A Melodious Journey through His Verses about?

मीरतक़ी ‘मीर’ का जन्म 28 मई, 1723 को तब के अकबराबाद और आज के आगरा में हुआ। 11 साल कीअल्पायु में ही माँ-बाप का साया छिनने के बाद वे आगरा से दिल्ली आ गए। कभी किसी नवाबऔर कभी किसी नवाब का सहारा मिलता और कभी फिर तन्हा रह जाते।मीरने अपनी आँखों से इतिहास बनते-बिगड़ते देखा। दिल्ली पर नादिर शाह का हमला और फिर अहमदशाह अब्दाली का दिल्ली पर हमला और मुगलों का पतन। इन आतताइयों के साथ उर्दू भी भारतआई। उर्दू को डेरे की ज़ुबान कहा जाता था। ऐसा इसलिए कि अलग-अलग इलाकों के सैनिकोंके जमावड़े में जो भाषाई तालमेल हुआ उससे उर्दू पैदा हुई। मीर का लिखना और उर्दू काअपने पैरों पर खड़े होना लगभग एक ही समय हुआ। उर्दू मीर की उँगलियाँ थाम आहिस्ता-आहिस्ताअपना सफ़र तय करते हुए उनकी निगाहबानी में जवान हुई।दिल्लीइस दौर से गुज़र रही थी, इसी दौरान मीर को लखनऊ के नवाब आसफुद्दौला की तरफ से बुलावाआया। लेकिन वहाँ भी वे लंबे वक़्त तक नहीं रह सके। एक बार नवाब आसफुद्दौला तालाब किनारेमछलियाँ पकड़ रहे थे। उन्होंने मीर से कहा कि कुछ सुनाइए। मीर ने जवाब दिया—‘मछलियाँखेलने से फुरसत मिल जाए तो मीर की शायरी सुनिए। नवाब का रहमोकरम उन जैसे ख़ुद्दार व्यक्तिको गवारा नहीं था। वो एक बार फिर अपने अकेलेपन और गरीबी में कैद हो गए।

Author
Sharma, Mahesh Dutt
Publisher
Prabhat Prakashan
Language
HI

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